सर्व शिक्षा अभियान

  1. पृष्ट भूमि
  2. उधेश्य
  3. मुख्य कार्यनीतियॉं
  4. घटक
  5. वित्तीय प्रतिमानक

  1. पृष्ट भूमि
  2. सर्व शिक्षा अभियान देश में प्रारंभिक शिक्षा के गुणवत्तापूर्ण सार्वजनीकरण हेतु एक महत्वाकांक्षी कार्यक्रम है। राज्यों की भागीदारी से 6-14 आयुवर्ग के सभी बच्चों को प्रारंभिक शिक्षा उपलब्ध कराने के संवैधानिक दायित्व को पूरा करने का यह एक ऐतिहासिक प्रयास है। स्त्री-पुरूष असमानता तथा सामाजिक विभेद को पाटकर प्रारंभिक शिक्षा को लोक-आधारित बनाते हुए एक मिशन के रूप में स्थापित करने की इसमें परिकल्पना की गयी है। बिहार राज्य के 17 जिलों में सर्व शिक्षा अभियान कार्यक्रम योजना वर्ष 2001-02 में लागू किया गया तथा वित्तीय वर्ष 2002-03 से राज्य के सभी जिलों में लागू है।

  3. उधेश्य
  4. सर्व शिक्षा अभियान कार्यक्रम के उद्देश्य इस प्रकार हैं ;

    1. सभी बच्चों के लिए वर्ष 2005 तक प्रारंभिक विद्यालय, शिक्षा गारंटी केन्द्र, वैकल्पिक विद्यालय, "बैक टू स्कूल" शिविर की उपलब्धता ।
    2. सभी बच्चे 2007 तक 5 वर्ष की प्राथमिक शिक्षा पूरी कर लें।
    3. सभी बच्चे 2010 तक 8 वर्षों की स्कूली शिक्षा पूरी कर लें ।
    4. संतोषजनक कोटि की प्रारंभिक शिक्षा, जिसमें जीवनोपयोगी शिक्षा को विशेष महत्त्व दिया गया हो, पर बल देना ।
    5. स्त्री-पुरूष असमानता तथा सामाजिक वर्ग-भेद को 2007 तक प्राथमिक स्तर तथा 2010 तक प्रारंभिक स्तर पर समाप्त करना ।
    6. वर्ष 2010 तक सभी बच्चों को विद्यालय में बनाए रखना ।
  5. मुख्य कार्यनीतियॉं
    • संस्थागत सुधार - सर्व शिक्षा अभियान के एक भाग के रूप में राज्यों में संस्थागत सुधार किए जाएंगे। राज्यों को अपनी मौजूदा शैक्षिक पद्धति का वस्तुपरक मूल्यांकन करना होगा जिसमें शैक्षिक प्रशासन, स्कूलों में उपलब्धि स्तर, वित्तीय मामले, विकेन्द्रीकरण तथा सामुदायिक स्वामित्व, राज्य शिक्षा अधिनियम की समीक्षा, शिक्षकों की नियुक्ति तथा शिक्षकों की तैनाती को तर्कसम्मत बनाना, मानीटरिंग तथा मूल्यांकन, लड़कियों, अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति तथा सुविधाविहीन वर्गो के लिए शिक्षा, निजी स्कूलों तथा ई.सी.सी.ई. संबंधी मामले शामिल होगें। कई राज्यों में प्रारंभिक शिक्षा प्रदान करने की व्यवस्था में सुधार के लिए संस्थागत सुधार भी किए गए हैं।
    • सतत वित्तपोषण - सर्व शिक्षा अभियान इस तथ्य पर आधारित है कि प्रारंभिक शिक्षा कार्यक्रम का वित्तपोषण सतत जारी रखा जाए। केन्द्र और राज्य सरकारों के बीच वित्तीय सहभागिता पर दीर्धकालीन परिप्रेक्ष्य की अपेक्षा है।
    • सामुदायिक स्वामित्व - इस कार्यक्रम के लिए प्रभावी विकेन्द्रीकरण के जरिए स्कूल आधारित कार्यक्रमों में सामुदायिक स्वामित्व की अपेक्षा है। महिला समूह, ग्राम शिक्षा समिति के सदस्यों और पंचायतीराज संस्थाओं के सदस्यों को शामिल करके इस कार्यक्रम को बढ़ाया जाएगा।
    • संस्थागत क्षमता निर्माण - सर्व शिक्षा अभियान द्वारा राष्ट्रीय शैक्षिक आयोजना एवं प्रशासन संस्थान/राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद्/राष्ट्रीय शिक्षक शिक्षा परिषद्/राज्य शैक्षिक अनुसंधान व प्रशिक्षण परिषद्/सीमेट (एस.आई.ई.एम.ए.टी.) जैसी राष्ट्रीय एवं राज्यस्तरीय संस्थाओं के लिए क्षमता निर्माण की महत्वपूर्ण भूमिका की परिकल्पना की गयी है। गुणवत्ता में सुधार के लिए विशषज्ञों के स्थायी सहयोग वाली प्रणाली की आवश्यकता है।
    • शैक्षिक प्रशासन की प्रमुख धारा में सुधार - इसमें संस्थागत विकास, नयी पहल को शामिल करके और लागत प्रभावी और कुशल पद्धतियां अपनाकर शैक्षिक प्रशासन की मुख्य धारा में सुधार करने की अपेक्षा है।
    • पूर्ण पारदर्शिता युक्त सामुदायिक मॉनीटरिंग - इस कार्यक्रम में समुदाय आधारित पद्धति अपनायी जायेगी। शैक्षिक प्रबंध सूचना पद्धति, माइक्रो आयोजना और सर्वेक्षण से समुदाय आधारित सूचना के साथ स्कूलस्तरीय आंकड़ों का संबंध स्थापित करेगी। इसके अतिरिक्त प्रत्येक स्कूल एक नोटिस बोर्ड रखेगा जिसमें स्कूल द्वारा प्राप्त कि गए सारे अनुदान और अन्य ब्यौरे दर्शाए जाएंगे।
    • आयोजना एकक के रूप में बस्ती - सर्व शिक्षा अभियान आयोजना की इकाई के रूप में बस्ती के साथ योजना बनाते हुए समुदाय आधारित दृष्टिकोण पर कार्य करता है। बस्ती योजनाएं जिला की योजनाएं तैयार करने का आधार होंगी।
    • समुदाय के प्रति जवाबदेही - सर्व शिक्षा अभियान में शिक्षकों, अभिभावकों और पंचायतीराज संस्थाओं के बीच सहयोग तथा जवाबदेही एवं पारदर्शिता की परिकल्पना की गयी है।
    • लड़कियों की शिक्षा - लड़कियों विशेषकर अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति की लड़कियों की शिक्षा सर्व शिक्षा अभियान का एक प्रमुख लक्ष्य होगी।
    • विशेष समूहों पर ध्यान - अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, धार्मिक एवं भाषाई अल्पसंख्यकों, वंचित वर्गो के बच्चों और विकलांग बच्चों की शैक्षिक सहभागिता पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
    • परियोजना पूर्व चरण - सर्व शिक्षा अभियान पूरे देश में सुनियोजित रूप से परियोजनापूर्व चरण प्रारम्भ करेगा जो वितरण और मानीटरिंग पद्धति को सुधार कर क्षमता विकास के अनेक कार्यक्रम चलाएगा।
    • गुणवत्ता पर बल देना - सर्व शिक्षा अभियान पाठ्यचर्या में सुधार करके तथा बाल केन्द्रित कार्यकलापों और प्रभावी शिक्षण पद्धतियों को अपनाकर प्रारंभिक स्तर तक शिक्षा को उपयोगी और प्रासंगिक बनाने पर विशेष बल देता है।
    • शिक्षकों की भूमिका - सर्व शिक्षा अभियान शिक्षकों की महत्वपूर्ण भूमिका को स्वीकार करता है और उनकी विकास संबंधी आवश्यकताओं पर ध्यान देने का समर्थन करता है। ब्लाक संसाधन केन्द्र/सामूहिक संसाधन केन्द्र की स्थापना, योग्य शिक्षकों की नियुक्ति, पाठ्य चर्या से संबंधित सामग्री के विकास में सहयोग के जरिये शिक्षक विकास के अवसर, शिक्षा संबंधी प्रक्रियाओं पर ध्यान देना और शिक्षकों के एक्सपोजर दौरे, शिक्षकों के बीच मानव संसाधन को विकसित कने के उद्देश्य से तैयार किए जाते है।
    • जिला प्रारम्भिक शिक्षा योजनाएं - सर्व शिक्षा अभियान के कार्यढ़ांचे के अनुसार प्रत्येक जिला एक जिला प्रारम्भिक शिक्षा योजना तैयार करेगा जो संकेद्रित और समग्र दृष्टिकोण से युक्त प्रारम्भिक शिक्षा के क्षेत्र में किए गए सभी निवेशों को दर्शाएगा।
  6. घटक

    सर्व शिक्षा अभियान के अन्तर्गत शिक्षकों की नियुक्ति, शिक्षक प्रशिक्षण, प्रारम्भिक शिक्षा का गुणात्मक सुधार, अध्ययन-अध्यापन सामग्रि यों का प्रावधान, शैक्षिक सहायता के लिए ब्लाक और सामूहिक संसाधन केन्द्रों की स्थापना, कक्षाओं और स्कूल भवनों का निर्माण, शिक्षा गारण्टी केन्दों की स्थापना और विकलांगों की समेकित शिक्षा और दूरस्थ शिक्षा आदि शामिल हैं। सर्व शिक्षा अभियान के दो पहलू हैं:

    1. यह प्रारम्भिक शिक्षा योजनाओं के कार्यान्वयन के लिए व्यापक सकेंद्रित ढांचा प्रदान करता है।
    2. यह प्रारम्भिक शिक्षा को सर्वसुलभ बनाने के उद्देश्य को प्राप्त करने हेतु महत्वपूर्ण क्षेत्रों को सुदृढ़ करने के लिए बजट प्रावधान करने वाला कार्यक्रम है।

    हालांकि राज्य और केन्द्रीय योजनाओं से प्रारम्भिक शिक्षा क्षेत्र के सभी निवेश, सर्व शिक्षा अभियान के ढांचे के भाग के रूप में दर्शाए जाएंगे, ये अगले कुछ वर्षों के भीतर सर्व शिक्षा अभियान में मिला दिए जाएंगे। कार्यक्रम के रूप में प्रारम्भिक शिक्षा को सर्वसुलभ बनाने के लिए यह अतिरिक्त बजट प्रावधान करता है।

  7. वित्तीय प्रतिमानक
    • सर्व शिक्षा अभियान के लिए केन्द्र और राज्य सरकारों के बीच वित्तीय भागीदारी नौवीं योजना अवधि के दौरान 85:15; दसवीं योजना में 75:25; ग्यारहवीं योजना के प्रथम दो वर्ष में 65:35  तथा उसके बाद यह 60:40 की होगी। लागत को वहन करने की वचनबद्धता राज्य सरकारों से लिखित रूप में ली जाएगी। राज्य सरकारों को वर्ष 1999-2000 में प्रारम्भिक शिक्षा में किए जा रहे निवेश को बरकरार रखना होगा तथा एस.एस.ए. में राज्यांश इस निवेश के अतिरिक्त होगा।
    • भारत सरकार राज्य कार्यान्वयन सोसाइटी को ही सीधे निधियां जारी करेगी तथा राज्य सरकार के हिस्से की कम से कम 50% राशि राज्य कार्यान्वयन सोसाइटियों को अंतरित करने तथा इस राशि के व्यय के बाद ही केन्द्र सरकार अगली किश्त जारी करेगी।
    • सर्व शिक्षा अभियान के अर्न्तगत नियुक्त किए गए शिक्षकों के वेतन में केन्द्रीय सरकार और राज्य सरकार की भागीदारी नौवीं योजना अवधि के दौरान 85:15 के अनुपात में, दसवीं योजना अवधि के दौरान 75:25 के अनुपात में, ग्यारहवीं योजना के प्रथम दो वर्ष में 65:35 तथा इसके बाद 60:40 के अनुपात में होगी।
    • बाह्‌य सहायता प्राप्त परियोजनाओं के संबंध में किए गए सभी विधिक समझौते लागू रहेंगे जब तक कि विदेशी निधियां प्रदान करने वाली एंजेसी से विचार-विमर्श करके इसमें कोई विशिष्ट संशोधन करने पर सहमति नहीं हो जाती।
    • विभाग की मौजूदा योजनाएं राष्ट्रीय शिक्षक शिक्षा परिषद् के अलावा नौवीं योजना के बाद मिला दी जाएंगी। प्राथमिक शिक्षा की राष्ट्रीय पोषाहार सहायता कार्यक्रम योजना (मध्याह्‌न भोजन योजना) एक विशिष्ट योजना के रूप में कायम रहेगी जिसमें खाद्यान्न एवं यातायात की लागत केन्द्र सरकार द्वारा वहन की जाएगी तथा भोजन पकाने की लागत राज्य सरकारों द्वारा वहन की जाएगी।
    • जिला शिक्षा योजना अन्य बातों के साथ-साथ यह स्पष्ट रूप से दर्शाती है कि जवाहर रोजगार योजना, प्रधानमंत्री रोजगार योजना, सुनिश्चित रोजगार योजना, एम.पी./एम.एल.ए. के लिए क्षेत्रीय निधियां, राज्य योजना जैसी योजनाएं तथा विदेशी निधियां तथा गैर सरकारी क्षेत्र में जुटाए गए संसाधन के अर्न्तगत विभिन्न घटकों से निधि / संसाधन उपलब्ध किए जाते हैं।
    • स्कूलों के स्तर में वृद्धि, रखरखाव, मरम्मत तथा अध्ययन-अध्यापन उपस्करों तथा स्थानीय प्रबंधन के लिए प्रयोग की जाने वाली सभी निधियां बी.ई.सी./स्कूल प्रबंधन समिति को हस्तांतरित कर दी जाएंगी।
    • अन्य प्रोत्साहन योजनाओं, जैसे छात्रवृतियां तथा वर्दियां प्रदान करने के लिए राज्य योजना के अन्तर्गत निधियां जारी की जाती रहेंगी। इन्हें सर्व शिक्षा अभियान से निधियां नहीं दी जाएंगी।