संदेश

सर्व शिक्षा अभियान युगों से लालायित जन-जन तक प्रारंभिक शिक्षा पहुँचाकर सामाजिक भेद और स्त्री-पुरूष की गैर-बराबरी मिटाने की कल्पना को साकार करने का एक ऐतिहासिक प्रयास है। देश के प्रारंभिक शिक्षा के क्षेत्र में बदलाव लाने की आकांक्षावाले इस सर्व शिक्षा अभियान का उद्देश्य ६-१४ आयुवर्ग के सभी बच्चे-बच्चियों को २०१० तक गुणवत्तापूर्ण उपयोगी शिक्षा आवश्यक रूप से हासिल कराना है।

सबों को बुनियादी शिक्षा से संपन्न करने की यह कोशिश दरअसल संवैधानिक दायित्वों को पूरा करने की ही एक सार्थक मुहिम है। “राज्य इस संविधान के लागू होने से १० वर्ष की अवधि में सभी बच्चों को, जब तक वे १४ वर्ष की आयु पूरी नहीं करे लेते, निःशुल्क तथा अनिवार्य शिक्षा प्रदान करने का प्रयास करेगा” - १९५० का यह संवैधानिक आदेश है। इस लंबित दायित्व को आवश्यक रूप से पूरा करने की समय-सीमा निर्धारित करते हुए ‘राष्ट्रीय शिक्षा नीति १९८६’ में संकल्प लिया गया – “इक्कीसवीं शताब्दी में पहुँचने से पहले यह १४ वर्ष की आयु के सभी बच्चों को संतोषजनक कोटि की निःशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा सुनिश्चित करेगा” । के.पी. उन्नीकृष्णन निर्णय १९९३- “चौदह वर्ष की आयु पूरी करने तक देश के प्रत्येक बच्चे/नागरिक को निःशुल्क शिक्षा का अधिकार प्राप्त है” - ने इसे राज्य के लिए बाध्यकारी बना दिया। अंततः १९९८ में शिक्षा मंत्रियों ने संकल्प लिया – “सर्व सुलभ प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त करने के लक्ष्य को मिशन के रूप में पूरा किया जाना चाहिए । प्रारंभिक शिक्षा को सर्व सुलभ बनाये जाने के लिए यह समय एवं संकेन्द्रित दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता पर बल देता है” । इसी के आलोक में गठित राष्ट्रीय समिति की १९९९ में आयी रिपोर्ट में सिफारिश की गयी – ‘प्रारंभिक शिक्षा को सर्वसुलभ बनाने के लिए जिला प्रारंभिक शिक्षा योजनाओं की तैयारी पर बल देकर, समय एवं संकेन्द्रित दृष्टिकोण से युक्त मिशन के रूप में प्रारंभिक शिक्षा को सर्वसुलभ बनाने का लक्ष्य प्राप्त किया जाना चाहिए’। समिति ने शिक्षा को मौलिक अधिकार बनाने तथा प्रारंभिक शिक्षा को सर्वसुलभ बनाने के लक्ष्य को मिशन के रूप में हासिल करने की कार्रवाई जल्द से जल्द शुरू करने की अपनी इच्छा भी जाहिर की। फलतः सबको शिक्षा सुलभ कराने के संवैधानिक संकल्पों वाले इस देश की संसद ने आजादी के ५४ वर्षों बाद भारतीय संविधान के अनुच्छेद ४५ के संकल्पों के मद्देनजर अंततः सबको प्रारंभिक शिक्षा सुलभ करानेवाली अब तक की सबसे ठोस कार्ययोजना के रूप में ‘सर्व शिक्षा अभियान’ को स्वीकृति देते हुए २८ नवंबर २००१ को ‘९३वाँ संविधान संशोधन के जरिये सबको शिक्षा का अधिकार’ को मौलिक अधिकार के रूप में पारित किया।

बहरहाल, २००१ ई. में स्वीकृत यह सर्व शिक्षा अभियान २०१० तक सभी बस्तियों में स्कूली सुविधा सुनिश्चित कर, शत-प्रतिशत नामांकन तथा सभी बच्चों को आठवीं तक स्कूलों में ठहरा कर सबों को प्रारंभिक शिक्षा हासिल करा देने का एक मिशन मूलक अभियान है। यह अभियान एक तरफ स्कूली कार्य-पद्धति में सुधार तथा दूसरी ओर समुदाय आधारित गुणवत्तापूर्ण प्रारंभिक शिक्षा एक मिशन के रूप में सुनिश्चित करने की दिशा में अग्रसर है।



राजेश भूषण, आई. ए. एस.
राज्य परियोजना निदेशक
बिहार शिक्षा परियोजना परिषद, पटना।